मेरे जजबात जमाने के जिगर के वास्ते किस हद तक मरहम का काम करने में कामयाब होंगे या कितनी माकूलन सीहत ,कितना शुकुन,कितनी तसल्ली ,कितनी खुशी दे सकेंगे ये फैसलें भी आने वाले वक्त की आम जबान से हीसुन सकेंगे । इनके वास्ते आज मैं मेरी ओर से कोई भी वक्त मुकर्रर नहीं करने की गुस्तखी नहीं कर सकता हूं ।

Poet : Mewari Itihas Doha
Language : Rajasthani

Poet : Bara Bind
Language : Rajasthani

Poet : Bikau Cycle By Kavi Amrit Wani
Language : Rajasthani

Poet : Nai Ka Beta
Language : Rajasthani

Poet : Sawariya Seth Chalisa
Language : Rajasthani

Poet : Bara Bind
Language : Rajasthani

Spike : Vandna Kumawat

Topic Nari Abhyuday