भोळाबा

गाँव का अनपढ़ भोळाबा की रई जसी मुसीबत वीं दान एकदम परवत जसी विकराल बणगी, जणी बगत मोटा शहर में हात–आठ जणा का हण्डाउं कजाणा कसान ई वे अचानक बिछुड़ग्या । हाल तो एक घण्टोई न व्यो वेई अन छीज–छीज

प्राईवेट मोटर

प्राईवेट मोटर मेंम्हारा सासरा कादो रूप्याई लागे ।पणसरकारी गाड़ी को कण्डक्टरआठ रूप्या मांगे ।। मूं बोल्योथू पैसा पूरा लेवेअनटिकट आदोई न देवे ।वो बोल्योअरे भोळा जीवइनै तो रोड़वेज की नौकरी केवे ।। मूं बोल्योसरकारी गाड़्या मेंअतरो भाव बढ़ग्यो ।ओरम्हारा ढाई

प्रेम रंग

चाय अन कप के न्यान होळी रो त्योहार अन रंग एक दूजा का असा लाड़ला साथी र्या थका के एक के बना दूजा ने एकल्लो रेबो आज तक कदी हुंवायोई कोनी । ज्यूं-ज्यूं होळी को तेवार लगतो-लगतो आवे ख्ूणा-खचारा में

परसाद्यो भगत (राजस्थानी कहानी)

आकाई गाँव में दो नाम मनकां की जिबान पे छड्या थका हा। एक भगवान शंकर को नाम अन एक वांको लाड़लो परसाद्यो भगत । यो गाँव बस्यो जदकाई ये दोई नाम गाँव के साथे-साथे रिया । गांव वाळा को कसोई

करगेंट्या के न्यान

जीत गयो र जीत गयो , वोटां वाळी जीत ।ढोल-नगाड़ा आज से , गावे थांका गीत ।।गावे थांका गीत , खुशबू वाळी माळा ।या तो मनखां जीत ,था मती करिजो छाळा ।।के ’वाणी’ कविराज , जा‘गा बारा के भाव ।करगेंट्या

लीछमी चोपा चराय

चोपा चराय लीछमी , आली काम्ड़ी हात ।बणावा सरपंच थने , चालो म्हाके साथ ।।चालो म्हाके साथ , थां दो गाँवा री शान ।थांके आड़ी आज , नाळ रयो वो भगवान ।।के ‘वाणी’ कविराज , अंगूटो दियो दिखाय ।करे न

झूंठ फेर झूंठी कही

उूबा वे सकता नहीं ,उूबा-उूबा जाय ।फारम भर्यो पंच को , टेको दीजो भाय ।।टेको दीजो भाय , काले पड़सी वोट ।मूं मां जायो बीर , कोने म्हारा में खोट ।।के ’वाणी’ कविराज , झूंठ फेर झूंठी कही ।जमानता भी

हार्या केड़े

हार्या केड़े देखजो , कठे-कठे ही खोट ।कतरा जिगरी कर गया ,हरता-फरता चोट ।।हरता-फरता चोट ,उड़ाग्या मूंडा रा रंग ।हाल-चाल बेहाल , कदी न कर ऐसो संग ।।के ’वाणी’ कविराज, जद दारू-पाणी नेड़े ।पी-पी के जो जाय , आय कुण